Nikhil Kumkum
Abstract
है परछाई भी मतलब की साथी
रौशनी में साथ निभाती है,
और अंधेरों के साए में
खुद ही गुम हो जाती है।
चलना है तो साथ चलो
वरना पीछे रह जाओगी
जब उतरूंगा साहिल से
झील में ,
तुम सूखी रह जाओगी ।
दो समानान्तर ...
काली स्याही
परछाई
अन्धविश्वास
आखरी नहीं हों...
मैं हूँ
बस तुम्हें इ...
वरदान
याद है ?
ये किसकी परछा...
अपने धुन में हैं रमे हुए, अपने मुकद्दर की तलाश में। अपने धुन में हैं रमे हुए, अपने मुकद्दर की तलाश में।
और मैं खुद में सिमटी .. इस ज़िन्दगी को जीने की नाक़ाम कोशिश में हूँ और मैं खुद में सिमटी .. इस ज़िन्दगी को जीने की नाक़ाम कोशिश में हूँ
यू तो चरागों से उम्मीदें रोशनी की मगर हावी हैं उनपे काली बदरिया। यू तो चरागों से उम्मीदें रोशनी की मगर हावी हैं उनपे काली बदरिया।
देश के कोने-कोने से .. दुश्मनों को मार भगाते हैं। देश के कोने-कोने से .. दुश्मनों को मार भगाते हैं।
भ्रम से बढ़कर हो गया, इंसान की कुटिल चाल , भ्रम से बढ़कर हो गया, इंसान की कुटिल चाल ,
चलो ख़ैर कोई बात नहीं, वक़्त अच्छा गुज़ारा था हमने साथ ! चलो ख़ैर कोई बात नहीं, वक़्त अच्छा गुज़ारा था हमने साथ !
वास्तव में दोस्तों जब उनके दिल में, उन्होंने थोड़े वक़्त के लिए रखा था। वास्तव में दोस्तों जब उनके दिल में, उन्होंने थोड़े वक़्त के लिए रखा था।
उम्मीदें खींचते, रुके जब जीवन नांव, शहर ढूंढे, भावना में हिलोरे लेते गांव। उम्मीदें खींचते, रुके जब जीवन नांव, शहर ढूंढे, भावना में हिलोरे लेते गांव।
खिल उठी फिर फुलवारी, चंद चमन के फूलों से। खिल उठी फिर फुलवारी, चंद चमन के फूलों से।
जो उसके कोमल मन में अपना घर बनाया।। जो उसके कोमल मन में अपना घर बनाया।।
अब तो बुलावा केवल औपचारिक हो गया क्या करे लोग कहते जमाना अब बदल गया। अब तो बुलावा केवल औपचारिक हो गया क्या करे लोग कहते जमाना अब बदल गया।
फिर भी तुम आज तक.. प्यार को मेरे समझ न पाए।। फिर भी तुम आज तक.. प्यार को मेरे समझ न पाए।।
पक्षी बनाते मुझमें नीड़, राहगीरों की लगती है भीड़, पक्षी बनाते मुझमें नीड़, राहगीरों की लगती है भीड़,
वक्त नहीं है आजकल बहुत बिजी होता हूं। वक्त नहीं है आजकल बहुत बिजी होता हूं।
दोनों का साथ जीवन को सुख देता हैं, एक दूसरे की बात बिना कहे समझ जाते हैं। दोनों का साथ जीवन को सुख देता हैं, एक दूसरे की बात बिना कहे समझ जाते हैं।
हंस कर चढ़ गया ,शेर सी दहाड़ सा वीर देश के लिए फांसी......शत शत उनको नमन हंस कर चढ़ गया ,शेर सी दहाड़ सा वीर देश के लिए फांसी......शत शत उनको नमन
खून से लथपथ वीर शरीर, रहेंगे सदा अजर अमर, खून से लथपथ वीर शरीर, रहेंगे सदा अजर अमर,
स्वतंत्रता की आड़ में सब खत्म हो जाएगा। स्वतंत्रता की आड़ में सब खत्म हो जाएगा।
कोई लौटा दो मुझे वो मेरे बचपन की सखियाँ। कोई लौटा दो मुझे वो मेरे बचपन की सखियाँ।
नजरों से देखे उपकार अनंत भगवान का नजरों से देखे उपकार अनंत भगवान का