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Varun Singh Gautam

Romance

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Varun Singh Gautam

Romance

परछाई के आँगन में

परछाई के आँगन में

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प्यार एक तरफा ही सही 

लेकिन........

मैं तुमसे मोहब्बत कर बैठा

पता है प्रेयसी, एक बात

तुझे देखने में मेरी आंखें

सुकून - सी भर जाती है

तेरी परछाई के आँगन में

तेरे बदन के समंदर में

एक बार भर - भर प्यार से

डूब जाऊँ, समा जाऊँ मैं

कभी ख्वाबों के मंजर में

तेरी तस्वीर को पाता हूँ

गर तस्वीर न मिले तो

खुद को सुखा पाता हूँ 

नाराजगी ही सही पर

मैं तृप्त - सा भर जाता हूँ

हेल - हेल मेरे कंचन मन में

बेचैनी से खुद को सता पाऊँ

तेरी स्पर्श की छुअन मुझे

रुह - रुह कांप उठती है मेरी

तुझे पाने की तमन्ना मेरी

पता है कभी पूरा नहीं होगा

फिर भी मैं दिल के उफान को

थाम कर शांत कर बैठता हूँ।


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