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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Abstract

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

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प्रभु का दर्शन

प्रभु का दर्शन

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दर्शन हम करने को

तड़पने लगे भगवन

फिरभी ना दर्शन हो सका !

बर्षों से हम खड़े

तेरे दर पे यूँ पड़े

आशीष ना हमको मिल सका !

दर्शन हम करने को

तड़पने लगे भगवन

फिरभी ना दर्शन हो सका !

बर्षों से हम खड़े

तेरे दर पे यूँ पड़े

आशीष ना हमको मिल सका !


क्या हमसे कोई भूल हुई

क्या हमसे कोई चूक हुई

बतला दो हमको तुम हमें ,

दर्शन हम करने को

तड़पने लगे भगवन

फिरभी ना दर्शन हो सका !

बर्षों से हम खड़े

तेरे दर पे यूँ पड़े

आशीष ना हमको मिल सका !


छुपके कहाँ

बैठे हो तुम

आओ ज़रा

मुझे देख लो !

ये क्या बेवसी

ये क्या है सितम

अपनों का दुःख

ज़रा बाँट लो !!

जियेंगे हम कैसे तुम्हारे बिना ,.

दर्शन हम करने को

तड़पने लगे भगवन

फिरभी ना दर्शन हो सका !



कहते हैं लोग

दानी तुझे

दाता हो तुम

सबके लिए !

मेरी हालत को

जाने नहीं

भोले बने हो

सबके लिए !

मेरी भी विनती सुन लो प्रभु ,

दर्शन हम करने को

तड़पने लगे भगवन

फिरभी ना दर्शन हो सका !



बर्षों से हम खड़े

तेरे दर पे यूँ पड़े

आशीष ना हमको मिल सका !

दर्शन हम करने को

तड़पने लगे भगवन

फिरभी ना दर्शन हो सका !

बर्षों से हम खड़े

तेरे दर पे यूँ पड़े

आशीष ना हमको मिल सका !

दर्शन हम करने को.




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