STORYMIRROR

SUNIL JI GARG

Comedy

4  

SUNIL JI GARG

Comedy

प्राइज की फैंटेसी

प्राइज की फैंटेसी

1 min
281

स्टोरी मिरर ने मुझको बुलाया है

स्टेज पर चढ़ा मैं, मिला है प्राइज़

मंच काफी जोर से हिलने लगा था

क्योंकि काफी बड़ा है मेरा साइज़


मेरी टीम के सदस्य सब मुस्काते थे

बजाते रहे थे वो मेरे लिए तालियाँ

मैं सबका धन्यवाद देने लगा वहाँ

दिखीं मुझे एक स्त्री की बालियाँ


हाँ वो स्त्री मेरी पत्नी ही थी, वही

जिसने मुझे याद दिलाया हर टॉपिक

मैंने सबको बता ही दिया कि कैसे

उसने मुझे कहा, फॉलो करो लॉजिक


मेरे हाथ में था एक बुक का कॉन्ट्रैक्ट

गदगद था मैं, फूला न समा रहा था

तभी महसूस हुआ, फैंटेसी थी मेरी

उठ जाओ, कोई आवाज लगा रहा था।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Comedy