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Sanjay Kumar

Inspirational

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Sanjay Kumar

Inspirational

पिता

पिता

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फटे कपड़े पहन लेता हैं पैदल भी चल लेता है,

मेरे सपनों की खातिर कर्ज भी ले लेता है,

ऐसा मेरा पालनहारा जिसका मैं राज दुलारा,

कहती है बेटा जिसको दुनियां मैं उसकी आंख का तारा।


पकड़ के मेरी उंगली को बैठा कंधे पर दुनिया दिखलाता है,

सब कुछ सहता है फिर भी हंसता है वही पिता कहलाता है,

फटे कपड़े पहन लेता है पैदल भी चल लेता है,

मेरे सपनों की खातिर कर्ज भी ले लेता है।


ऐसा मेरा पालनहारा जिसका मैं राज दुलारा,

मेरी खातिर सवाल दुनिया के उनको भी सुलझाता है,

किताब मेरी लाता है दुनिया का ज्ञान खुद पढ़ आता है,

अपने परायों की सुनता है वही पिता कहलाता है।


फटे कपड़े पहन लेता है पैदल भी चल लेता है,

मेरे सपनों के खातिर कर्ज भी ले लेता है,

ऐसा मेरा पालनहारा जिसका में राज दुलारा।


दुनिया के मेले में मुझे सब खुशियां

दिला कर खुद खाली हाथ आता है,

जाने कितनी परेशानियों को खुद छुपा लेता है

वही पिता कहलाता है,


फटे कपड़े पहन लेता है पैदल भी चल लेता है,

मेरे सपनों के खातिर कर्ज भी ले लेता है,

ऐसा मेरा पालनहारा जिसका मैं राज दुलारा,


कुछ सालों के बाद अब वक्त का पहिया बदलने लगता है,

जिंदगी का भी नजरिया बदलने लगता है,

 मैं बड़ा होने लगता हूं मेरे बचपन का हीरो अब बुरा लगने लगता है,

जिसकी मैं था आंख का तारा अब वही पिता मेरी आंखों में चुभने लगता है,


फटे कपड़े पहन लेता है पैदल भी चल देता है,

मेरे सपनों की खातिर खर्च भी ले लेता है,

ऐसा मेरा पालनहारा जिसका मैं राज दुलारा।


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