STORYMIRROR

Veena Mishra ( Ratna )

Abstract

3  

Veena Mishra ( Ratna )

Abstract

पिता-जीवन का आधार

पिता-जीवन का आधार

1 min
449

आप हो वृक्षों की लंबी कतार

शीतल और छायादार

धरा सा कोमल हृदय

या कहूँ अंतहीन आकाश

जहाँ पंखों ने मेरे लिया आकार

निडर हो भरने को उड़ान

अतुलनिये जिसका प्यार,,

पिता -आप ही मेरे जीवन का आधार

अनहोनी की आशंकाओं में

थके कदमों से भी बने रहे पहरेदार

भूला के सारे स्वपन अपने

मेरे सपनों को सदा किया सकार

और दिखाया मुझे ये सुंदर संसार

पिता -आप ही मेरे जीवन का आधार



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract