Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Veena Mishra ( Ratna )

Abstract


5.0  

Veena Mishra ( Ratna )

Abstract


पिता-जीवन का आधार

पिता-जीवन का आधार

1 min 426 1 min 426

आप हो वृक्षों की लंबी कतार

शीतल और छायादार

धरा सा कोमल हृदय

या कहूँ अंतहीन आकाश

जहाँ पंखों ने मेरे लिया आकार

निडर हो भरने को उड़ान

अतुलनिये जिसका प्यार,,

पिता -आप ही मेरे जीवन का आधार

अनहोनी की आशंकाओं में

थके कदमों से भी बने रहे पहरेदार

भूला के सारे स्वपन अपने

मेरे सपनों को सदा किया सकार

और दिखाया मुझे ये सुंदर संसार

पिता -आप ही मेरे जीवन का आधार



Rate this content
Log in

More hindi poem from Veena Mishra ( Ratna )

Similar hindi poem from Abstract