पीड़ा गाने आया हूँ
पीड़ा गाने आया हूँ
जीवन के सौ गान सुनाने आया हूँ ।
मैं मतवाला पीड़ा गाने आया हूँ ।।
पीड़ाओं के रंग घुले थे, ऐसा सागर ले आया ।
लाखों टूटे दिल बहलाने, मस्त-कलंदर ले आया ।
तेरी-मेरी-इसकी-उसकी, प्यास बुझाने आया हूँ...।
जीवन के गान...।।
लिए हृदय में दुख के नगमे, मुस्कानों को गाता हूँ ।
आँसू से भीगी हैं पलके, फिर भी स्वप्न जगाता हूँ ।
बरस-बरस कर अंदर-अंदर, प्यार लुटाने आया हूँ...
मैं मतवाला.....।।
बजते रहे हजारों घण्टे, होती रही अजानें भी ।
तड़प-तड़प कर मरी मनुजता, गीता पढ़ीं कुरानें भी ।
आज हिमालय के सीने में, दृष्टि जगाने आया हूँ...
मैं मतवाला......।।
एक समन्दर मचला तो, कितने ही पर्वत दरक गये ।
बस एक दिए की हिम्मत पर, कितने ही तूफ़ाँ ठिठक गये ।
मैं शून्य सही, पर शून्य नहीं, सबको दिखलाने आया हूँ...
मैं मतवाला.......।।
मैंने पीड़ाओं को घोला, उसकी रंगत खूब गयी ।
मैंने अपना दर्द निचोड़ा, उसमें दुनिया डूब गई ।
जिनको पीकर जीवन भूले, वे पैमाने लाया हूँ...।
मैं मतवाला......।।
