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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

Inspirational

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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

Inspirational

पीड़ा गाने आया हूँ

पीड़ा गाने आया हूँ

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जीवन के सौ गान सुनाने आया हूँ ।

मैं मतवाला पीड़ा गाने आया हूँ ।।


पीड़ाओं के रंग घुले थे, ऐसा सागर ले आया ।

लाखों टूटे दिल बहलाने, मस्त-कलंदर ले आया ।

तेरी-मेरी-इसकी-उसकी, प्यास बुझाने आया हूँ...।

जीवन के गान...।।


लिए हृदय में दुख के नगमे, मुस्कानों को गाता हूँ ।

आँसू से भीगी हैं पलके, फिर भी स्वप्न जगाता हूँ ।

बरस-बरस कर अंदर-अंदर, प्यार लुटाने आया हूँ...

मैं मतवाला.....।।


बजते रहे हजारों घण्टे, होती रही अजानें भी ।

तड़प-तड़प कर मरी मनुजता, गीता पढ़ीं कुरानें भी ।

आज हिमालय के सीने में, दृष्टि जगाने आया हूँ...

मैं मतवाला......।।


एक समन्दर मचला तो, कितने ही पर्वत दरक गये ।

बस एक दिए की हिम्मत पर, कितने ही तूफ़ाँ ठिठक गये ।

मैं शून्य सही, पर शून्य नहीं, सबको दिखलाने आया हूँ... 

मैं मतवाला.......।।


मैंने पीड़ाओं को घोला, उसकी रंगत खूब गयी ।

मैंने अपना दर्द निचोड़ा, उसमें दुनिया डूब गई । 

जिनको पीकर जीवन भूले, वे पैमाने लाया हूँ...।

मैं मतवाला......।।



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