sushma bogale
Tragedy
एक बहुत अच्छी
बात कही है किसी ने
इंसान को जब सब कुछ
मिल जाता है
तब वो और ज्यादा
गरीब हो जाता है
इंसान की फितरत नहीं
बदलेगी।
चिंगारी
पुजारी
शतरंज
लोग
नोट
अमीर
राम
फितरत
१५९ वाला
ढूंढेगी
शहर की आब-ओ-हवा है ठीक नही तुम अभी आना नही। शहर की आब-ओ-हवा है ठीक नही तुम अभी आना नही।
तमस की गुहा में क्यों, स्त्रियाँ अब जल रहीं। तमस की गुहा में क्यों, स्त्रियाँ अब जल रहीं।
आज जब सदियों की खोज के बाद उसने ढूंढ़ लिया है 'ना ' शब्द। आज जब सदियों की खोज के बाद उसने ढूंढ़ लिया है 'ना ' शब्द।
अब अकेले तय न होगा यह दुःख भरा जीवन का सफ़र। अब अकेले तय न होगा यह दुःख भरा जीवन का सफ़र।
अजी नौकरी का भी अपना मज़ा है। जहां अपनी चलती नही कुछ रज़ा है। अजी नौकरी का भी अपना मज़ा है। जहां अपनी चलती नही कुछ रज़ा है।
पंक्तियों की प्रेरणा बेच दी जब जाती है, वह रमणी कोठे पर रात भर वीर्य से नहाती है। पंक्तियों की प्रेरणा बेच दी जब जाती है, वह रमणी कोठे पर रात भर वीर्य से नहात...
गांव रहे कहाँ कोई तो बताये ? आधे गांव तो शहर लील गये । गांव रहे कहाँ कोई तो बताये ? आधे गांव तो शहर लील गये ।
अथाह स्वेद बहाती है। अपनी जठराग्नि बुझाती है।। अथाह स्वेद बहाती है। अपनी जठराग्नि बुझाती है।।
देख-देख चिठ्ठी को कई-कई बार छू कर चिठ्ठी को अनपढ भी “एहसासों” को पढ़ लेते थे...!! देख-देख चिठ्ठी को कई-कई बार छू कर चिठ्ठी को अनपढ भी “एहसासों” को पढ़ लेते थे...
पहाड़ खाली हो रहे हैं पलायन की विपदा भारी है। पहाड़ खाली हो रहे हैं पलायन की विपदा भारी है।
हवाओं में लिपटी है खुशियां कहीं कहीं घुटन में बंद कोई काया है। हवाओं में लिपटी है खुशियां कहीं कहीं घुटन में बंद कोई काया है।
वो अतीत की काली परछाई पल पल मन को दुखी कर जाती। वो अतीत की काली परछाई पल पल मन को दुखी कर जाती।
चीखती नदी मौन प्रार्थना में लीन हो जाती है। चीखती नदी मौन प्रार्थना में लीन हो जाती है।
पूजन भजन व साधना सत्कार में, क्यों फँसा आराधना विस्तार में ! पूजन भजन व साधना सत्कार में, क्यों फँसा आराधना विस्तार में !
राजनीति के खेल में क्या हार क्या जीत ; ना कोई शत्रु यहां और ना यहां कोई मीत ! राजनीति के खेल में क्या हार क्या जीत ; ना कोई शत्रु यहां और ना यहां कोई मीत !
दौड़ रहे हैं आँख मूँद कर सपनों के पीछे गिद्ध, छडूंदर, घोड़ा, हाथी, चमगादड़, तीतर।। दौड़ रहे हैं आँख मूँद कर सपनों के पीछे गिद्ध, छडूंदर, घोड़ा, हाथी, चमगादड़, ...
इक दुबला पतला सा पेड़ था, चंद टहनियां चंद पत्ते थे। इक दुबला पतला सा पेड़ था, चंद टहनियां चंद पत्ते थे।
कहने लगा, "फर्ज़ अदा करने की सज़ा मिली है एक बाप को।" कहने लगा, "फर्ज़ अदा करने की सज़ा मिली है एक बाप को।"
है कितना क्षण भंगुर यह जीवन, अगले पल का पता नहीं। है कितना क्षण भंगुर यह जीवन, अगले पल का पता नहीं।
धरती ऐसे जल रही, जैसे जले मशाल। धूल-धूल रस्ते हुए, सूखे-सूखे ताल। धरती ऐसे जल रही, जैसे जले मशाल। धूल-धूल रस्ते हुए, सूखे-सूखे ताल।