sushma bogale
Fantasy Others
भटकती हुई आग
को बुझाना
आसान नहीं छोटी
चिंगारी को नजरंदाज
मत करना
तुम देखते रह
जाओगे वह तुम्हें
जला के रख देगी
चिंगारी
पुजारी
शतरंज
लोग
नोट
अमीर
राम
फितरत
१५९ वाला
ढूंढेगी
'कांपती पत्ती गुलाब की, यूँ अधरों को में रूप देता, फिर सिखा तुझे नाम अपना, तुझसे नया सा सुन लेता।' ए... 'कांपती पत्ती गुलाब की, यूँ अधरों को में रूप देता, फिर सिखा तुझे नाम अपना, तुझसे...
फिर हवाओं में कहीं गुम हो जाती वो फिर हवाओं में कहीं गुम हो जाती वो
मुझे एक दिन और मिला इस संसार का हिस्सा बनने के लिए। मुझे एक दिन और मिला इस संसार का हिस्सा बनने के लिए।
मैं अपनी हकीकत से खुद को नकार कर खुद की हकीकत खोजने में गुम हो चुका मैं अपनी हकीकत से खुद को नकार कर खुद की हकीकत खोजने में गुम हो चुका
तू ही है प्रीत, तू ही मनमीत ,तू ही संगीत है जानम तुझे क्या नाम दूं जानम। तू ही है प्रीत, तू ही मनमीत ,तू ही संगीत है जानम तुझे क्या नाम दूं जानम।
भावनाओं की डोर पर तर्क के खंजर से न वार करना भावनाओं की डोर पर तर्क के खंजर से न वार करना
आओ दोनों यह सुख-दुःख का जाम पी लेते हैं जो बची है ज़िन्दगी चलो एक साथ जी लेते हैं ! आओ दोनों यह सुख-दुःख का जाम पी लेते हैं जो बची है ज़िन्दगी चलो एक साथ जी लेते है...
राधा कहतीं, " खूब जानती हूँ मैं तुम्हें", और रंग देतीं कृष्ण के गाल, और बिखर जाता सार राधा कहतीं, " खूब जानती हूँ मैं तुम्हें", और रंग देतीं कृष्ण के गाल, और बिखर...
‘गुडिया’ सी नुमाइश करती है फिर वह ‘टीवी’ ‘फ्रिज’ स्कूटर’ हो जाती है . ‘गुडिया’ सी नुमाइश करती है फिर वह ‘टीवी’ ‘फ्रिज’ स्कूटर’ हो जाती है .
मुझ में अच्छे गुण भी हैं और बुरे गुण भी हैं मुझ में अच्छे गुण भी हैं और बुरे गुण भी हैं
रह लेता हूँ मैं भी अकेला, जैसे रहती हो तुम भी खोई, ये बेपरवाही या और ही कुछ है, तुम तो अब नादाँ नहीं... रह लेता हूँ मैं भी अकेला, जैसे रहती हो तुम भी खोई, ये बेपरवाही या और ही कुछ है, ...
मेरे सपने...। मेरे सपने...।
ये कविता महज़ एक आत्मा की उत्पत्ति है ये कविता महज़ एक आत्मा की उत्पत्ति है
कोरे कागज़ पर रंग बिरंगी स्याही से, दिल के अरमानों को उकेरा था! कोरे कागज़ पर रंग बिरंगी स्याही से, दिल के अरमानों को उकेरा था!
वात्सल्य उनकी आँखों का वर्णन से है दूर बहुत वात्सल्य उनकी आँखों का वर्णन से है दूर बहुत
और हमारे प्यार से रिश्ता अब सपनों की दुनिया मे निभाया करो और हमारे प्यार से रिश्ता अब सपनों की दुनिया मे निभाया करो
यह बहती नदी भी मैं आज से तुम औरतों के हवाले कर रहा हूँ यह बहती नदी भी मैं आज से तुम औरतों के हवाले कर रहा हूँ
कोई जगह कोई दहर हो जहाँ वक़्त न पंहुचा हो अभी भी बेवक़्त पहुँचेंगे वहाँ और बैठे रहेंगे सोचा क... कोई जगह कोई दहर हो जहाँ वक़्त न पंहुचा हो अभी भी बेवक़्त पहुँचेंगे वहाँ और ...
भीड़...। भीड़...।
उन यादों को मन कभी ना भूल पाएगा ताउम्र यादों को जेहन में लेकर चलता जाएगा। उन यादों को मन कभी ना भूल पाएगा ताउम्र यादों को जेहन में लेकर चलता जाएगा।