STORYMIRROR

goutam shaw

Abstract Romance

4  

goutam shaw

Abstract Romance

फितरत ना बदल सका

फितरत ना बदल सका

1 min
346

तेरी संग सजी मन-मोदक

जीवंत नहीं स्मृति सही

रखा मैंने संदूक में भर के

फितरत ना बदल सका ।।

फिजाओं ने भरा सरगम

वसुंधरा ने भरा नई ऊर्जा

मन मयूर नृत्य पुकारा तुझे

फितरत ना बदल सका ।।

रिम- झीम से बारिश में

जब -जब भीगा मेरा अंग

तेरा साया भीगा मेरे संग

फितरत ना बदल सका ।।

ज्वार- भाटा की खनक में

खुद किया मैंने समर्पण

पूरा ना सही अधूरा सही

फितरत ना बदल सका ।।

आत्मा अलग प्राण अलग

ये नहीं कभी हो पाया

मेरे प्राण वायु बिक चुका

तुम ही सदा खरीदार प्रिय

फितरत ना बदल सका ।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract