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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Inspirational

फिर से नया हिंदुस्तान बनाएं

फिर से नया हिंदुस्तान बनाएं

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नफरतों के इस शहर में 

हम शांति का पैगाम लाए, 

चलो हम सब मिलकर 

फिर से नया हिंदुस्तान बनाएं ।


भूखे पेट सोने वालों के 

थाली में दो रोटी सजाएं, 

चलो हम सब मिलकर 

फिर से नया हिंदुस्तान बनाएं । 


जो पथ भ्रमित करने पर तुले हैं 

उन्हें सत्य का पाठ पढ़ाएं 

चलो हम सब मिलकर 

फिर से नया हिंदुस्तान बनाएं । 


रोग ग्रसित काया को 

फिर से निरोगी - निर्मल बनाएं, 

चलो हम सब मिलकर 

फिर से नया हिंदुस्तान बनाएं । 


रुदन भरे अधरों पर 

फिर से खुशियों का वर्धन कराएं, 

चलो हम सब मिलकर 

फिर से नया हिंदुस्तान बनाएं । 


निराशा भरे नैनों में फिर से 

आशा की हम ज्योत जलाएं, 

चलो हम सब मिलकर 

फिर से नया हिंदुस्तान बनाएं । 


अज्ञानता के तमस को हम सब 

ज्ञान दीप से दूर भगाएं, 

चलो हम सब मिलकर 

फिर से नया हिंदुस्तान बनाएं । 


बहती जीवन धारा को हम सब 

मिलजुल कर पार कराएं, 

चलो हम सब मिलकर 

फिर नया हिंदुस्तान बनाएं । 


कोशिश रहे हम साथ चलेंगे 

यह साथ कभी न छुटने पाए ,

चलो हम सब मिलकर 

फिर से नया हिंदुस्तान बनाएं ।



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