फौजी का परिवार
फौजी का परिवार
टूट रही हैं साँसें परिवार बिखर रहे,
भरी जवानी में फौजी अलविदा कह रहे,
छोड़ रहे हैं फौजी यह जहाँ,
कर ना पाये चंद लम्हे बात अपनों से यहाँ,
अंत समय गले मिलने का अरमान,
साथ लेकर गये ना जाने कहाँ।
बन्दूक की गोलियों से ना जाने,
कितने शरीर छलनी हो गये,
ना जाने कितने दिल टूट गये,
अनेकों परिवार दम तोड़ गये।
हर घड़ी डर दिलों में होता है,
ना जाने कब धमाका हो जाये,
यह खौफ़ दिलों में होता है,
घंटी बजती है फौजी के घर में जब,
हाथ कांपने लगता है फोन उठाने में उनका तब,
दस्तक होती दरवाजे पर जब,
दिल धड़कने लगता है उनका तब,
संकली खोलने में डर लगता है,
अशुभ समाचार का डर दिलों में पलता है।
दीपावली के बम भ्रमित करते हैं तो,
लाल रंग होली का लहू सा दिखता है,
करवा चौथ पर चाँद आयेगा या नहीं,
यह ख्याल आँखों में अश्रु भरता है।
रक्षाबंधन पर राखी बिन बांधे ही रह ना जाये कहीं,
अगले ही पल बच्चे अनाथ ना हो जायें कहीं,
बूढ़ी माँ तस्वीर पर हार चढाती है,
बूढ़े कंधे पिता के कंधा देते हैं,
नन्हे बचपन पिता के साये से वंचित रहते हैं,
तिरंगे से लिपटे शरीर पर लाखों अश्रु बहते हैं।
ऐसी ही ज़िंदगी जीते हैं फौजी के परिवार सभी,
बहुत बड़ा है जिगर इनका,
मौत के साये में पल रहे हैं मासूम सभी।
हर पल कुछ कर गुजरने का हौसला दिलों में रखते हैं,
अपने पश्चात अपने परिवार की चिंता को दिलों में दफ़न करते हैं,
भारत माँ के चरणों में पूरी ज़िंदगी अर्पण करते हैं,
शहीद होते हैं सीमा पर फौजी जब,
उनके साथ उनके परिवार भी शहीद होते हैं तब,
साँसे चलती हैं उनकी किन्तु शरीर मृतप्राय होते हैं।
