फ़ैसला
फ़ैसला
राहों पर चलने का फ़ैसला कर लिया,
साहिल ने मंज़िल को पाने का फैसला कर लिया।
लफ्ज़ों में उड़ने का फैसला कर लिया,
शामियाना सज़ा है तेरे इंतजार में,
बरसते हुए बादलों ने बरसने का फ़ैसला कर लिया।
इंतजार ना कर किसी के आने का,
लगा दे दम मंजिल तक पहुंच जाने का।
सागर भी खौल गया है, लहरों के रूप में,
कश्तियां हिचकोले खा रही हैैं परियों के रूप में।
उठ गया है तूफ़ान जज्बातों के सैलाब से,
बिजलियों ने भी अब कड़कने का फ़ैसला कर लिया है।
परिंदों की भी अब जुबानें बोल रही हैं,
बेड़ियां तोड़कर पैरों की, उड़ने का फ़ैसला कर लिया है।
नहीं रुकते हैं अब मेरे भी कदम,
सड़क ने भी संवरने का फ़ैसला कर लिया है।
पहाड़ियों के पत्थर भी अब बोल उठे हैं,
पानी ने भी जलने का फ़ैसला कर लिया है।
यूं तो रुख़सत हो जाता है समय भी जाने-अनजाने में,
सीप ने भी मोतियों में बदलने का फ़ैसला कर लिया है।
