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Bhawna Vishal

Romance Tragedy

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Bhawna Vishal

Romance Tragedy

फागुन

फागुन

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फागुन

जिद्दी बच्चे के जैसे

रंग भरी-दुपहरी तक

खेलता है,


लगा के नाम होली का

बीच बाजार,सरेराह ठेलता है


और जो ना मानू तो

मारे चिढ के

भर भर उदासियां

मुझपे उड़ेलता है।


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