STORYMIRROR

Bhawna Vishal

Tragedy

4  

Bhawna Vishal

Tragedy

' पाखंड '

' पाखंड '

1 min
436

संसार भर की

पीड़ाओं को

अवगुंठन में धकेल के,


संसार भर की

दात्री के

अधिकारों को पीछे ठेल के,


वचनो की प्रवंचनाएं 

भर भर मुख उड़ेलते हो,


वाह रे ,मनु की संतानों!

ये ढोंग दिवस वाले

बड़ी भली भाँति तुम खेलते हो।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy