पहाड़ और प्यार
पहाड़ और प्यार
पहाड़ और प्यार दोनों का अद्भुत संगम
प्यार साथ में हो तो पहाड़ भी जन्नत सम
बिन प्यार जीवन पहाड़ सा आता नजर
प्यार के संग फूल खिलें पत्थरों की डगर ।
पहाड़ जीवन, निकलें गंगोत्री यमुनोत्री धार
शक्तिपीठ बसे पहाड़, भवसागर होवे पार ।
पत्थर दिल पहाड़ भाव शून्य, लोग कहते
नहीं, कितना ज्वालामुखी अंतर में संजोते ।
अपने मन को स्थिर रखने की देते सीख
नये संघर्ष, सहनशक्ति, चुनौती की लीक।
पर्वत मौसम, ऋतु ,कृषि भोजन कारक
जड़ी-बूटी, पशु व औषधियों के उपकार।
धरा के पेपरवेट से ,भूकंप रोधी सहायक
हतभाग्य इंसान ये लालच का है नायक
गिट्टी, कंक्रीट बना हमें नेस्तनाबूद किया
इंसा ये कैसी बात? कर प्यार, धोखा दिया
