Dr. Anuradha Jain
Inspirational
समय आज ज़रा
सख्त है
शायद
कोई भूल
अपराध
और फिर गुनाह
बन गया है
अंधेरी रात
की सुबह
आएगी
उजालों को जो
खींच लाएगी।
कब तक
है आज जिंदगी
म।क
सुहानी
एक गूंज
बंद-बंद
आज
आओ बदले
शांति
ऐसा यदि हो जा...
आओ मिल बैठकर शांति, प्रेम भाइचारे की बात करें। आओ मिल बैठकर शांति, प्रेम भाइचारे की बात करें।
बस खुद को पा चुकी हूँ, 'सोनिया' में समा चुकी हूँ। बस खुद को पा चुकी हूँ, 'सोनिया' में समा चुकी हूँ।
उठो धरा के वीर सपूतों, भारत को हमें बचाना है। उठो धरा के वीर सपूतों, भारत को हमें बचाना है।
खुश रहे जीवन भर बस यही प्रभु से मेरी आस… खुश रहे जीवन भर बस यही प्रभु से मेरी आस…
कविता! तुम कभी न रूठना मुझसे जब पुकारूँ, पास आ जाना झट से। कविता! तुम कभी न रूठना मुझसे जब पुकारूँ, पास आ जाना झट से।
मददगार बनके साथ निभाओ हर विपदा को ज़रा दूर भगाओ! मददगार बनके साथ निभाओ हर विपदा को ज़रा दूर भगाओ!
इतना हँसो कि दर्द बहकर निकल जाए और तुम्हारे सारे मुखौटे गिर जाएं। इतना हँसो कि दर्द बहकर निकल जाए और तुम्हारे सारे मुखौटे गिर जाएं।
यादें आती जाती रेल गाड़ी सी हो चली हैं यादों से स्टेशन से रह गए है देह में भीतर तक यादें आती जाती रेल गाड़ी सी हो चली हैं यादों से स्टेशन से रह गए है देह में भीत...
सुन मूर्ख इंसान यह जीवन है वरदान। सुन मूर्ख इंसान यह जीवन है वरदान।
नायक का किरदार जीवन के रंगमंच पर शुरू होकर, मृत्यु शय्या पर ख़त्म होता है। नायक का किरदार जीवन के रंगमंच पर शुरू होकर, मृत्यु शय्या पर ख़त्म होता है।
विचार ऊँचे रखना सदैव ही। सुलाभ होगा तुमको तथैव ही॥५॥ विचार ऊँचे रखना सदैव ही। सुलाभ होगा तुमको तथैव ही॥५॥
कर्मों की सजा कर्मों की सजा
यह जीवन है, और इसकी प्रदर्शक, इसकी पगडंडियां, इसके टेड़े मेड़े रास्ते... यह जीवन है, और इसकी प्रदर्शक, इसकी पगडंडियां, इसके टेड़े मेड़े रास्ते...
शब्द ही तो हैं जो समझते हैं मुझे पूर्ण रूपेण हूबहू जैसी मैं हूँ वैसी ही बिल्कुल वैसी शब्द ही तो हैं जो समझते हैं मुझे पूर्ण रूपेण हूबहू जैसी मैं हूँ वैसी ही बि...
मन भाये रंग गुलाबी गुलाबी रंग मुस्कान का इसमें मिलाया है। मन भाये रंग गुलाबी गुलाबी रंग मुस्कान का इसमें मिलाया है।
उम्र भर ठहर जाऊं.. साथ तुम्हारे ? उम्र भर ठहर जाऊं.. साथ तुम्हारे ?
पूरी शिद्दत से करो। मौका जब भी मिले जिंदगी में,उसे स्वीकार करो। पूरी शिद्दत से करो। मौका जब भी मिले जिंदगी में,उसे स्वीकार करो।
नारी बरखा सी शीतल है, अपने भीतर बसंत सी चंचल है।। नारी बरखा सी शीतल है, अपने भीतर बसंत सी चंचल है।।
कंकरीट के जंगल चारों तरफ यहाँ अब है मिलते कंकरीट के जंगल चारों तरफ यहाँ अब है मिलते
पानी का होता रहेगा अकाल आओ बचाएं जल, खोजे सुनहरा कल। पानी का होता रहेगा अकाल आओ बचाएं जल, खोजे सुनहरा कल।