Dr. Anuradha Jain
Abstract
आज दिल के बजे साज
खुद पर हुआ नाज
ठहरे कदमों का राग
उलझी रागिनियो का साज
उलझनों को तोड़ के आज
मस्तियों का हुआ राज
कुछ तो पाया है आज
दिल ने दिल से ही रखा राज
न जाने क्यों यह मौन है
सब चीज आज गौन है
वो धुंधली झलक सरीखी कौन है।
कब तक
है आज जिंदगी
म।क
सुहानी
एक गूंज
बंद-बंद
आज
आओ बदले
शांति
ऐसा यदि हो जा...
क्या ये समाज एक लड़की को इंसान समझ पायेगा ? या यूं ही पुरुष प्रधान समाज चलता रह जाएगा? क्या ये समाज एक लड़की को इंसान समझ पायेगा ? या यूं ही पुरुष प्रधान समाज चलता र...
सभी किरदारों को निभाते हुए जीवन उनका भी कठिन होता है। सभी किरदारों को निभाते हुए जीवन उनका भी कठिन होता है।
अपने स्वार्थ के लिए उसको कैद कर दिया, छीनकर आसमान उसका उसे पिंजरा दे दिया, अपने स्वार्थ के लिए उसको कैद कर दिया, छीनकर आसमान उसका उसे पिंजरा दे दिया,
बातों की ये घुट्टी, हर दिन घिस कर, उसे चटायी जाती हैं l बातों की ये घुट्टी, हर दिन घिस कर, उसे चटायी जाती हैं l
इच्छा रूपी नगरी का मन राजा है जो बहुत संवेदनशील है। इच्छा रूपी नगरी का मन राजा है जो बहुत संवेदनशील है।
होंठों पर पपड़ियां न जमने देना कि मेरे छूते ही ख़ून की बूंदें टपकने लगें। होंठों पर पपड़ियां न जमने देना कि मेरे छूते ही ख़ून की बूंदें टपकने लगें।
विस्मृत हुआ दुर्योधन को हों भीमसेन या युधिष्ठिर, विस्मृत हुआ दुर्योधन को हों भीमसेन या युधिष्ठिर,
विज्ञान ने हर क्षेत्र में कर ली कितनी तरक्की, विज्ञान पर ही तो चल रही दुनिया की चक्की। विज्ञान ने हर क्षेत्र में कर ली कितनी तरक्की, विज्ञान पर ही तो चल रही दुनिया ...
प्रभु भेजते नर रूप में गुरु को, जो कहलाते ब्रह्म ज्ञानी।। प्रभु भेजते नर रूप में गुरु को, जो कहलाते ब्रह्म ज्ञानी।।
पत्र युग के बाद आया मोबाइल का ज़माना लंबी बात होना बंद हो गया था पत्र युग के बाद आया मोबाइल का ज़माना लंबी बात होना बंद हो गया था
जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही ज़िन्दगी के गणित को समझ पाना जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही ज़िन्दगी के गणित को समझ पाना
विश्वास के धागों से बंधी ये दोस्ती अनमोल दौलत होती है। विश्वास के धागों से बंधी ये दोस्ती अनमोल दौलत होती है।
कि नजरों के सामने वो गाड़ी में चली गई, और मै बस देखता रहा। कि नजरों के सामने वो गाड़ी में चली गई, और मै बस देखता रहा।
पहने ऐनक और हाथ छड़ी ,छवि बड़ी ही मनमोहक होती थी। पहने ऐनक और हाथ छड़ी ,छवि बड़ी ही मनमोहक होती थी।
गिरे गर टूटकर शाख से पत्ते, तो मिट्टी में मिल ही जाते हैं. गिरे गर टूटकर शाख से पत्ते, तो मिट्टी में मिल ही जाते हैं.
थक जाता तन-मन जीवन भर पैसा कमाने में, जिंदगी बीत जाती है दुनिया को ही दिखाने में, थक जाता तन-मन जीवन भर पैसा कमाने में, जिंदगी बीत जाती है दुनिया को ही दिखाने ...
हम सबने मिलकर ठाना है अब अपने भारत को स्वच्छ बनाना है। हम सबने मिलकर ठाना है अब अपने भारत को स्वच्छ बनाना है।
हाँ अब काफी साल बीत गए पुरानी बातों को याद करके हाँ अब काफी साल बीत गए पुरानी बातों को याद करके
राशियों की चाल पर ग्रह थिरकते रहे सुब्ह होती रही रात ढलती रही ।। राशियों की चाल पर ग्रह थिरकते रहे सुब्ह होती रही रात ढलती रही ।।
जो पूछ बैठे मेरे प्रेम का साथी कहां गई मेरी हृदय वासी रे! जो पूछ बैठे मेरे प्रेम का साथी कहां गई मेरी हृदय वासी रे!