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Dr. Anuradha Jain

Abstract

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Dr. Anuradha Jain

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बंद-बंद

बंद-बंद

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बंद बंद है तंग-तंग  है

पर दिल मे. जाने क्यों आनंद है

ना जाने क्या यह देखता

बड़ी लंबी लंबी है फेंकता 


इसे ना डर कोई

दिल दंग दंग है

बंद बंद है तंग तंग है

दिल की दुनिया में उमंग है


दिल करीब है, लफ्ज़ चंद है

न जाने कैसा ढंग ढंग है

कुछ भी हो, दिल में उमंग है

सब बंद बंद है


सभी तंग है

बस दिल से दिल की जंग जंग है।


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