STORYMIRROR

Mamta Singh Devaa

Inspirational Others

4  

Mamta Singh Devaa

Inspirational Others

पेड़ संरक्षक / आदम भक्षक

पेड़ संरक्षक / आदम भक्षक

1 min
287

कभी किसी ने पेड़ों का फुसफुसाना सुना है ?

नहीं सुना तो सुनिए...


ये हौले - हौले आदम के रक्षा की बातें करते हैं

कैसे उनको बचाएं धीरे से यही मंत्रणा रचते हैं,


कभी किसी ने पेड़ों का अफसाना गुना है ?

नहीं गुना तो गुनिए...


ये सारे सरसरी आवाज़ में बतियाये हैं

अपनी गिनती कम होने की करते शिकायतें हैं,


कभी किसी ने पेड़ो को आपस में मिलते देखा है ?

नहीं देखा तो देखिए...


ये भी हमारी तरह एक दूसरे को पास बुलाते हैं

डालियों से गलबहियाँ डाल करते मुलाकातें हैं,


कभी किसी ने पेड़ो की हॅंसी महसूस किया है ?

नहीं किया तो कीजिए...


ये जब वर्षा होती है तो इनकी बूंदों से तर जाते है

उस वक्त ये जी भर - भर कर खिलखिलाते हैं,


कभी किसी ने पेड़ो के आंसुओं को परखा है ?

नहीं परखा तो परखिए...


ये चुपचाप खड़े प्रकृति की कीमत लगते देखते हैं

आदम की कृतघ्नता पर हीरे से आंसू टपकाते हैं,


कभी किसी ने पेड़ो को कर्ज उतारते आंका है ?

नहीं आंका तो आंकिए...


ये धरा को रक्षा के लिए देखते करते चीत्कार है

इसके घाव पर मरहम लगा होते कुर्बान हैं,


कभी किसी ने आदम जात को जाना है ?

नहीं जाना तो जानिए...


ये वो जात है जो जिस डाल पर निर्भर करती है

एहसान फरामोश उसी डाल को पल में काट देती है 

एहसान फरामोश उसी डाल को पल में काट देती है ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational