पड़ाव और भी है
पड़ाव और भी है
पड़ाव और भी है, मुकाम और भी है।
यूं तो महफिल में नाम और भी है।
जो दिल में होता है, चेहरे पर दिखता है
पर मेरे इस दिल के आयाम और भी है।
कश्ती ये वो नहीं, जो डूब जाये हवा के
झोंकों से
इसके तूफानों के सफर के अंजाम
और भी है।
ना बात खत्म हुई, ना दिल खाली हुआ,
उनके नाम पर,
उन्हें देने को पैगाम और भी है।
खुशनुमा कुछ पल, साथ गुजारे है उनके
जिसका कभी जिक्र नहीं किया, ऐसी
शाम और भी है।
जितना जानना चाहोगे, उतना उलझ
जाओगे
मुझ पर दुनिया के इल्जाम और भी है।
रुकना तो बहुत दूर है, अभी तो चलना
शुरू किया है
अपनी ऊँची उड़ानों को सलाम और भी है।
तुम भी यूँ ही घबरा गए, इक छोटी सी हार से
अभी तो मचाने को कोहराम और भी है।
और ख़ुदा खैर करे,
कहीं हम रुखसत हो गए वक़्त से पहले,
तो कह देना जमाने से,
कि कुछ कर गुजरने की ख़्वाहिश रखने वालो में,
ये इक नाम और भी है।
पड़ाव और भी है, मुकाम और भी है।
यूं तो महफिल में नाम और भी है।
