पानी की प्यास
पानी की प्यास
चला जा रहा हूं सुनसान रास्ते पर मैं,
ग्रीष्म की धूप से परेशान हो गया हूं,
पसीने से बहुत तरबतर हो कर मैं,
पानी की प्यास से अति तड़प रहा हूं।
पानी की तीव्र प्यास लगने पर मैं,
जीभ -होंठ का गीलापन गंवा रहा हूं,
ग्रीष्म की गर्म लहरो और ताप से मैं,
आंखों में अंधेरा महसूस कर रहा हूं।
मन में हौसला रखकर रास्ते पर मैं,
पानी की तलाश करते मर रहा हूं,
दूर दूर सरिता का प्रवाह देखकर मैं,
आनंदित हो कर वहाँ पहुंच रहा हूं।
निर्मल पानी से प्यास मिटाकर मैं,
तन मन से अति संतुष्ट हो रहा हूं,
गर्मी में पानी का दानी बनकर "मुरली",
मैं जलघर बनाने का संकल्प कर रहा हूं।
