नया जन्म
नया जन्म
आज तो नया जन्म है मेरा
मैं हरिद्वार कल हो आया हूँ।
बीते पलों की सब यादों को
गंगा में मैं डुबो आया हूं।
पछतावे के सब सापों को
मार के वही दफना डाला है।
पाप पुण्य के संतापों को
घाट पर कहीं जला डाला है।
अहंकार-घमंड का सब का लिख
बैठ वहीं पर धो आया हूं।
आज तो नया जन्म है मेरा
मैं हरिद्वार कल हो आया हूँ।
ईर्ष्या की सारी अग्नि को
इक डुबकी ने ठंडा कर डाला।
शोहरत मान के झूठे धन का
सूरज को अर्पण कर डाला।
प्यार के सारे रिश्ते नाते
भीड़ में कहीं पर खो आया हूं।
आज तो नया जन्म है
मेरा मैं हरिद्वार कल हो आया हूँ।
मन का पूरा लोभ और लालच
हवन में मैं अर्पण कर आया।
और चिंता की गठरी को भी
गंगा में विसर्जन कर आया।
संतुष्टि की ओढ़ के चादर
कल की रात मैं सो आया हूं।
आज तो नया जन्म है मेरा
मैं हरिद्वार कल हो आया हूँ।
एक घूँट जो पी गंगाजल की
शांत हुई तृष्णा की ज्वाला।
क्रोध और मोह को त्याग दिया
खुद का समर्पण मैंने कर डाला।
अलौकिक मुस्कान की चेहरे
पर लेकर के लौ आया हूं।
आज तो नया जन्म है मेरा
मैं हरिद्वार कल हो आया हूँ।
आज तो नया जन्म है मेरा
मैं हरिद्वार कल हो आया हूँ।
