Manish Kumar Srivastava
Abstract
भाव है बढ़ा
पहली तारीख का
नवल वर्ष
नई इस्वी पे
बाजार में रौनक
रंगीन फ़िज़ा
नूतन वर्ष
अर्ध रजनी पर
थिरके युवा
गुलाब पुष्प
प्रेमिका के हाथ में
प्रेमी के साथ।
दोपहरी में बज...
वंदनीय हे! सै...
2021 की यात्...
पाहुन (अतिथि...
एकता और समानत...
विश्व विजय ,त...
माँ
कोरोना विजय तक रखना है मन में सतत् विचार। कोरोना विजय तक रखना है मन में सतत् विचार।
डॉक्टर मसीहा जीवन दान देता है जीवन दान देता है। डॉक्टर मसीहा जीवन दान देता है जीवन दान देता है।
ख्वाहिश ही तो पंख हैं मेरे जो उड़ने की तमन्ना रखते हैं। ख्वाहिश ही तो पंख हैं मेरे जो उड़ने की तमन्ना रखते हैं।
मैं बिना किसी की इजाज़त के जीना चाहती हूँ। मैं बिना किसी की इजाज़त के जीना चाहती हूँ।
फिर ख़बर के साथ बार बार मरता है ! फिर ख़बर के साथ बार बार मरता है !
करूँ किससे तुम्हारी सुन्दरता की तुलना मुझको वो सुमन नहीं मिलते ! करूँ किससे तुम्हारी सुन्दरता की तुलना मुझको वो सुमन नहीं मिलते !
सोचने-समझने की क्षमता नहीं होती पर मनुष्यों में ये बेवजह होती है। सोचने-समझने की क्षमता नहीं होती पर मनुष्यों में ये बेवजह होती है।
तुझे दुख ना दूं ऐसी शक्ति मुझे देना क्योंकि मेरी मां में अंबे की शक्ल है। तुझे दुख ना दूं ऐसी शक्ति मुझे देना क्योंकि मेरी मां में अंबे की शक्ल है।
वो धुंधली झलक सरीखी कौन है। वो धुंधली झलक सरीखी कौन है।
प्यार वह नहीं जो आजकल के नौजवानों के सर चढ़के बोलता है, प्यार वह नहीं जो आजकल के नौजवानों के सर चढ़के बोलता है,
वो नाचती थी कभी हकीकतों से परे, आज भी नाचती है । हकीकतों के तले। वो नाचती थी कभी हकीकतों से परे, आज भी नाचती है । हकीकतों के तले।
अगर मां पहचाननी है तो जिनकी मां नहीं होती, तुम एक दिन वहां रहना। अगर मां पहचाननी है तो जिनकी मां नहीं होती, तुम एक दिन वहां रहना।
सपने देख रात बिताऊँ, दिन भर भरता पेट। बढ़ -बढ़ कर डींग मारता जैसे धन्ना सेठ।। सपने देख रात बिताऊँ, दिन भर भरता पेट। बढ़ -बढ़ कर डींग मारता जैसे धन्ना सेठ।।
मन व्याकुल है अखियां प्यासी, मोहे तेरे मिलन की आस।। मन व्याकुल है अखियां प्यासी, मोहे तेरे मिलन की आस।।
कर्तव्य के ख़ातिर ये कर्मवीर सदा, ही जिंदगी दांव पर लगाया करते हैं। कर्तव्य के ख़ातिर ये कर्मवीर सदा, ही जिंदगी दांव पर लगाया करते हैं।
क्योंकि वक्त़ बीत रहा है, हाँ वक़्त बीत रहा है। क्योंकि वक्त़ बीत रहा है, हाँ वक़्त बीत रहा है।
जैसे एक बच्चा मां की गोद में। बता तुझ में मुझ में अन्तर ही क्या है। जैसे एक बच्चा मां की गोद में। बता तुझ में मुझ में अन्तर ही क्या है।
भगवान मैं तेरी आभारी हूं कि मैं आज की नारी हूं। भगवान मैं तेरी आभारी हूं कि मैं आज की नारी हूं।
तुझ में अब जीने की भी चाह नहीं मैंने बेजान मुर्दे को जीते देखा है। तुझ में अब जीने की भी चाह नहीं मैंने बेजान मुर्दे को जीते देखा है।
बाज़ार में खड़े हो जमीर रख के आना, चलते नहीं हैं सारे खरीददार के साथ। बाज़ार में खड़े हो जमीर रख के आना, चलते नहीं हैं सारे खरीददार के साथ।