Manish Kumar Srivastava
Abstract
भाव है बढ़ा
पहली तारीख का
नवल वर्ष
नई इस्वी पे
बाजार में रौनक
रंगीन फ़िज़ा
नूतन वर्ष
अर्ध रजनी पर
थिरके युवा
गुलाब पुष्प
प्रेमिका के हाथ में
प्रेमी के साथ।
दोपहरी में बज...
वंदनीय हे! सै...
2021 की यात्...
पाहुन (अतिथि...
एकता और समानत...
विश्व विजय ,त...
माँ
उपजा प्रेम जो कण कण में, हर प्रश्न का फिर हल मिल जाना।। उपजा प्रेम जो कण कण में, हर प्रश्न का फिर हल मिल जाना।।
कुछ तो जादू था माँ तेरे आँचल में... कुछ तो जादू था माँ तेरे आँचल में...
संग चलता है, सुख दुख में साथ निभाता, मेरे राह के रोड़े हटा, सदा फूल बिखराता संग चलता है, सुख दुख में साथ निभाता, मेरे राह के रोड़े हटा, सदा फूल बिखराता
हर दिल में यही दुआ पले, मेरे देश, तू ऐसे ही फूले फले। हर दिल में यही दुआ पले, मेरे देश, तू ऐसे ही फूले फले।
जन-जन में जागृति ला दी, सदियों से थे यह मेरे साथी। जन-जन में जागृति ला दी, सदियों से थे यह मेरे साथी।
मेरा सफरआज भी जारी है और तब तक जारी रहेगा जब तक श्वेता की एक भी सांस बाकी है। मेरा सफरआज भी जारी है और तब तक जारी रहेगा जब तक श्वेता की एक भी सांस ब...
..तुम तो बस एक ख्याल थे जैसे कोई जादू थे तुम। ..तुम तो बस एक ख्याल थे जैसे कोई जादू थे तुम।
उस परमेश्वर को याद रखो क्युँकि यात्रा बहुत छोटी है। उस परमेश्वर को याद रखो क्युँकि यात्रा बहुत छोटी है।
खिलने दो उसे बगियाँ में। भ्रूण हत्या नहीं करवाओ।। खिलने दो उसे बगियाँ में। भ्रूण हत्या नहीं करवाओ।।
ये दुनियाँ होता है, तब जादू कोई होता है। ये दुनियाँ होता है, तब जादू कोई होता है।
यह खुदा का कोई जादू है या कोई अनकही सी कहानी है। यह खुदा का कोई जादू है या कोई अनकही सी कहानी है।
मनोरंजन और इंसान का नाता है गहरा इसके लिए जाने कितने उपाय है वह करता। मनोरंजन और इंसान का नाता है गहरा इसके लिए जाने कितने उपाय है वह करता।
दूर कहीं, अनंत यात्रा पर, वापसी जहां से नहीं होती मुमकिन ! दूर कहीं, अनंत यात्रा पर, वापसी जहां से नहीं होती मुमकिन !
तनख्वाह...? मुझे मेरी तनख्वाह से बहुत प्यार है...।। ६ ।। तनख्वाह...? मुझे मेरी तनख्वाह से बहुत प्यार है...।। ६ ।।
जादू बेशक करता हूं पर यह तो हाथ का खेल है, जिसमें पारंगत इंसान ही कहलाता जादूगर हैं। जादू बेशक करता हूं पर यह तो हाथ का खेल है, जिसमें पारंगत इंसान ही कहलाता जादू...
हौसले में होती है कमी ताकतें हैं रोकती हमें चलने से हौसले में होती है कमी ताकतें हैं रोकती हमें चलने से
यह थे बचपन के अनमोल पल सुहाने काश फिर से आएं दिल बहलाने। यह थे बचपन के अनमोल पल सुहाने काश फिर से आएं दिल बहलाने।
हर आहट पे पलट के देखना कि कहीं वो आया तो नहीं हर आहट पे पलट के देखना कि कहीं वो आया तो नहीं
अपनों से जो बैर करे, वह दुनिया से कैसे तरे। अपनों से जो बैर करे, वह दुनिया से कैसे तरे।
मैंने लगाया था एक दिन अपना सूटकेस रखे थे कुछ कपडे़, एक डायरी ,एक पेन मैंने लगाया था एक दिन अपना सूटकेस रखे थे कुछ कपडे़, एक डायरी ,एक पेन