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Ganesh Chandra kestwal

Inspirational

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Ganesh Chandra kestwal

Inspirational

नवीन वेला नव वर्ष आ रही

नवीन वेला नव वर्ष आ रही

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विधान- ।ऽ। ऽऽ। ।ऽ। ऽ।ऽ

॥ॐ श्री वागीश्वर्यै नमः॥ 

नवीन वेला नव वर्ष आ रही।

छटा निराली उर को लुभा रही।

महान कांक्षा उर में समा रही ।

सुमार्ग प्यारा सबको दिखा रही॥१॥


नहीं कभी भी निज रीति छोड़नी।

नई सुभद्रा शुभ नीति जोड़नी ।

विकास होगा अब धार मोड़नी।

सदैव दीवार विरोध तोड़नी॥२॥


सुगंध युक्ता अब वायु सोहती। 

सुचित्त को है वह नित्य मोहती।

वसंत भी है पिक गीत गा रहे ।

चला नया वर्ष हमें सुना रहे॥३॥


किसान सारे अति मोदमान हैं। 

नवीन दाने मनका समान हैं।

सुचित्त भी गीत नवीन गा रहा।

धरा सुहाती नव वर्ष आ रहा॥४॥


उड़ान ऊँची खग व्योम ले रहे।

अतीव प्यारा नव ज्ञान दे रहे ।

विचार ऊँचे रखना सदैव ही।

सुलाभ होगा तुमको तथैव ही॥५॥


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