नवीन वेला नव वर्ष आ रही
नवीन वेला नव वर्ष आ रही
विधान- ।ऽ। ऽऽ। ।ऽ। ऽ।ऽ
॥ॐ श्री वागीश्वर्यै नमः॥
नवीन वेला नव वर्ष आ रही।
छटा निराली उर को लुभा रही।
महान कांक्षा उर में समा रही ।
सुमार्ग प्यारा सबको दिखा रही॥१॥
नहीं कभी भी निज रीति छोड़नी।
नई सुभद्रा शुभ नीति जोड़नी ।
विकास होगा अब धार मोड़नी।
सदैव दीवार विरोध तोड़नी॥२॥
सुगंध युक्ता अब वायु सोहती।
सुचित्त को है वह नित्य मोहती।
वसंत भी है पिक गीत गा रहे ।
चला नया वर्ष हमें सुना रहे॥३॥
किसान सारे अति मोदमान हैं।
नवीन दाने मनका समान हैं।
सुचित्त भी गीत नवीन गा रहा।
धरा सुहाती नव वर्ष आ रहा॥४॥
उड़ान ऊँची खग व्योम ले रहे।
अतीव प्यारा नव ज्ञान दे रहे ।
विचार ऊँचे रखना सदैव ही।
सुलाभ होगा तुमको तथैव ही॥५॥
