STORYMIRROR

AVINASH KUMAR

Romance

2  

AVINASH KUMAR

Romance

नजर

नजर

1 min
471

लगी है कैसी नजर जमाने की

कोई वजह ही नहीं मुस्कुराने की,


जो था सब जलकर खाक हुआ

अब क्या जरूरत है शमां बुझाने की,


दर्द जब मिल ही गया जिंदगी भर का

अब क्या जरूरत है किसी को बताने की,


लाख बहलाओ मन को पर बहलता नहीं 

समझाओ लाख दिल को समझता नहीं,

 

आकाश में लाखों तारे गिनता नहीं 

हकीकत मेरी है कि तुम बिन दिल लगता नहीं ,


सबक लो जमाने का जमानत नहीं प्रेम में

ज़िंदा होते हुए भी तब्दील होते लाश में।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance