STORYMIRROR

aazam nayyar

Abstract Tragedy Inspirational

4  

aazam nayyar

Abstract Tragedy Inspirational

नजर

नजर

1 min
206

प्यार में आज़म कब वो वफ़ा दें गया 

इस क़दर प्यार में वो दग़ा दें गया


प्यार के ही बढ़ाएं क़दम थें जिसनें

हर क़दम पे वो अब फ़ासिला दें गया


तोड़कर वो सगाई उल्फ़त का रिश्ता 

आंखों में अश्कों का सिलसिला दें गया


प्यार के हर वादे कल उसनें तोड़कर 

वो ग़मों की दिल में ही सदा दें गया


दें गया वो दग़ा के जफ़ा के कांटे 

फ़ूल कब वो मुझे बावफ़ा दें गया


जख़्म आज़म भरेगा नहीं जो कभी 

प्यार करने का ऐसा सिला दें गया।

आज़म नैय्यर 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract