Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Gurminder Chawla

Inspirational abstract

4  

Gurminder Chawla

Inspirational abstract

नेत्रदान

नेत्रदान

1 min
962


तेरे नयन नही दो दीप थे ,

ऐसे जैसे चहरे पर दो मोती चिपकाये हों

रंग उनका ऐसा कजरीला था

जैसे आँखों के रंग इन्द्रधनुष से चुराये हों

एक दिन वो अचानक संसार से चल दी

क्या उन अनमोल रत्नो को खोने देते ?

आँखों को चिर निद्रा मे सोने देते ।

उनका सम्मान तो करना था इसलिए नेत्रदान तो करना था ।

देकर ज्योती दूसरे नेत्रहीन को तुम्हे पुनर्जीवित तो करना था ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational