नेताओं के हाथों ईमान बिकते हैं
नेताओं के हाथों ईमान बिकते हैं
इस दुनिया मे ख़बर बिकती है और ख़बरों वाले इंसान भी बिकते हैं
इन झूठे नेताओं के हाथों मे यहाँ झूठे ईमान बिकते हैं ..
इस समाज की हक़ीक़त-ए-सूरत कौन लिखेगा
दौर-ए-झूठ में तो कलम बिकती है और कलाम बिकते हैं ..
इन झूठे नेताओं की ये झूठी कहानियाँ है
जनता के पास तो इनकी फ़रेब की निशानियाँ है ..
हर उन झूठे नेता ने समय समय पर सरिफ लोगों को ठगा है
इनकी हिफाज़त में ही हमारी कई सैनिकों ने दी कुर्बानियाँ है।
