STORYMIRROR

Neetu Jharotia "Rudrakshi"

Abstract Inspirational

4  

Neetu Jharotia "Rudrakshi"

Abstract Inspirational

नदी-नदीश

नदी-नदीश

1 min
273

झरने की रागिनी लगती हैं

पायल की झनकार

मन को सुहाती इसकी ठंडी फुहार 

लहराती है हवा नागिनी-सी 

सुनकर झरने की झनकार


फिर बनती हैं इस से नदिया  

कल कल करती सुर-सरिता 

सबके श्रवणो को है सुहाती 

बहती है जब सर्पिणी सी 


निकलती भूधर से लहराती 

सर-सर करती सुर बनाती

फिर गिरती है नदीश में 

होता संगम निम्नगा का वारीश में 


देखो फिर सागर है इतराता

मिलकर अपनी आपगा से 

कभी साहिल से है टकराता 

कभी समीर से बातें करता 


समीर जो इसे गगन पर ले जाता 

फिर से मेघ बन मही पर गिरता 

वापस वही सिलसिला चलता रहता।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract