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Gulab Jain

Abstract

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Gulab Jain

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नासमझ इन्सान

नासमझ इन्सान

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मंदिर-मस्जिद घूम रहा,

घूमे चर्च गुरुद्वारा।


पर मानवता समझ न

पाया ये इंसां बेचारा।


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