नारी
नारी
हाँ ,मैं नारी हूँ
भूलो बीती बातों को
मैं आधुनिक नारी हूँ ।
पिता का गुमान हूँ
भाई का ईमान हूँ
माँ की शान हूँ।
मेरा जन्म उत्सव है
भाई का सा दम है
हर पल वह मेरे संग है ।
भाई के बराबर पढाई है
परिवार शोभा बढ़ाई है
बेटी न अब पराई है ।
आधुनिक नारी हूँ
बिन दहेज आई हूँ
पति की परछाई हूँ।
दो परिवारों का अब गर्व हूँ
सीमाओं में रह चलती हूँ
सबके मन की करती हूँ।
परिवार का प्यार मेरा मान
मायका ससुराल है गुमान
नारी होना मेरा अभिमान।
जरूरी नहीं हर बार अपनी मर्ज़ी चले
अपनों के लिए समझौता भी करे
आधुनिक नारी, सब समझे ,चले ।
अबला नहीं सबला हूँ
हक के लिए लड़ जाती हूँ
दुर्गा काली बन जाती हूँ ।
