नारी तोड़ पुरुष वर्चस्व
नारी तोड़ पुरुष वर्चस्व
ब्रह्मांड कि आधी शक्ति देवों कि देवी माँ बहन बेटी औरत ओमेन नारी ।।
समाज चेतना का नाम नारी पुरुष प्रधान समाज कि चैतन्य सत्ता व्यवहार नारी।।
पुरुष प्रधान समाज जननी पुरुषों द्वारा ही अपमानित होती कभी रिश्तों कि मर्यादा कि खातिर
कभी पुरुष स्वाभिमान तो पुरुष वैभव विरासत कि खातिर नारी।।
कभी पुरुष पराक्रम कि रक्षा में उठ खड़ी होती बन दुर्गा काली तू नर कि नारायणी तू महिमा गरिमा नारी।।
समाज कि तू साहस शौर्य गाथा काल तू युग अभिलाषा प्रकाश तू रिश्तों राष्ट्र समाज कि बुनियाद नारी।।
चाहे जितने भी आये झंझावत तूफान नहीं टूटती नहीं झुकती नारी।।
तू काल समय अभिमान पुरुष प्रधान समाज की अवधारणा विचार परिवर्तित कर सकती नारी।।
वर्चस्व सर्वोपरि कर सकती वर्चस्व पुरुष का तोड़ना नारी उत्कर्ष उतसर्ग नारी ।।
तू बढ़ती जा नए कलेवर नए युग काल में नई बुलंद इबारत लिखती जा नारी।।
सफलता सोपानों कि नए अध्याय आयाम गढ़ती जा पुरुषों पर भारी तू नारी ।।
वर्चस्व नहीं तुम पर पुरुष का तू पुरुषों की शक्ति सारी।।
