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Devaram Bishnoi

Abstract

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Devaram Bishnoi

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"नारी केअनेकानेक रूप'

"नारी केअनेकानेक रूप'

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प्रथम मां जगत जननी

द्वितीय पुरूषअर्द्धांगिनी हैं।


मां ने संसार दर्शन करवाए।

अंगुली पकड़कर चलना सिखाया।


मैला बाजार से बहुत सुंदर खिलोंने दिलाये।

मां से बढ कर संसार में कोई नहीं हैं।


जगत में पिताजी भी पालनहार नहीं हैं।

सिर्फ अकेली मां पालनहार हैं।


नौ माह उद्धर में रख दुुःख सहती हैं।


गिले में खुद सोती लाल को सुुुखे में 

सुलाती हैं।


मां के बहू उपकार हम सब पर हैं।


कभी माता-पिता को वृद्धाश्रमों में मत छोड़ना।


इसी जन्म में उनके बहु उपकार में से 

कुछ तो वापिस में अवश्य चुका देना।


माता-पिता केआशीर्वाद से जीवन सफल बना लेना।


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