नारी एक शक्ति का अहसास
नारी एक शक्ति का अहसास
उम्मीदों को वो पंख देती
आसमां तक उड़ान भरती है,
बांध न पाए कोई उसे
वह खुद अपनी तक़दीर लिखती है।
मत समझो तुम उसको अबला,
हर बाधा को चूर-चूर करती है,
हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवाकर
योग्यता अपनी सिद्ध करती है।
न रुकती है, न झुकती है,
हर मुश्किलों से सदा लड़ती है,
आग में तपकर कुंदन जैसी,
वो हरदम ही चमकती है।
सपनों को साकार बना दे,
हौसलों को दिल में रखती है,
जो ठाने वो कर दिखाए,
ये जिद हमेशा रखती है।
सीमाओं से बढ़कर आगे
एक नया दौर वो लाएगी,
हर अंधेरे को चीरकर अब
अपनी शक्ति का अहसास कराएगी।
आंखों में उसके सूरज की लौ
हृदय में है सागर की गहराई,
संघर्षों से अब ना घबराए,
वो हर दर्द को बना दे स्याही।
स्नेह से भीगी ममता उसकी,
हृदय से वो चट्टान है,
प्यार की गहराइयों में डूबी बेशक
पर इरादों में एक तूफान है।
अब न कोई उसे रोक सकेगा
न हार का डर उसे सताएगी,
हर राह में उसके दीप जलेगा
जब वो खुद पहचान बनाएगी।
