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GOPAL RAM DANSENA

Abstract Romance

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GOPAL RAM DANSENA

Abstract Romance

ना मैं आऊंगी

ना मैं आऊंगी

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झूठी तेरी ये हर हमदर्दी यारा

तेरे झूठ का खुल गया पिटारा

रोता है दिल तेरे पास आ के

अब कभी तेरे पास ना मैं आऊंगी I


एक दूजे पर तोहमत लगा के

नहीं जीना हमें अब घुट घुट के

रोना ही अगर दिल लगाने की सजा है

दिल की जज्बात में, ना मैं आऊंगी I


चलो बांट लेते हैं सुख दुख की संसार

हमें तुम पतझड़ दे दो ,ले लो तुम बहार

ये अंतिम बात है जिसे तुम याद रखना

तेरे किसी मंजिल पे इत्तफाक ना मैं आऊंगी


जाओ याद रखेंगे, दिल का फ़साना I

दिल जानता है ,ये जानेगा ना जमाना

अब शिकवा नहीं किसी से कोई

तौबा ये इश्क़ तुझे रास ना मैं आऊंगी I



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