STORYMIRROR

Mansi Singh

Romance

3  

Mansi Singh

Romance

मुस्कुरा

मुस्कुरा

1 min
162

मुस्कुरा देते हैं कभी यूँ भी कि

कभी हम भी तेरा रूह ख्याल थे।


भूल जाते हैं फिर ना जाने क्यूँ कि 

उठे कितने दिल में सवाल थे।


ये लब करते हैं कभी गुमराह दर्द को

मगर दर्द के तो बिछे बहुत जाल थे।


फितरत है अश्कों पर पैबंद लगाने की 

जताते नहीं कि दरारों में क्या हाल थे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance