STORYMIRROR

Mansi Singh

Others

4  

Mansi Singh

Others

आधी रात

आधी रात

1 min
325

आधी रात के बाद सन्नाटे में पसरी सड़कें

जैसे कोई भूली बिसरी कहानी याद दिलाती हैं

चांदनी रात में जब तन्हा होकर बैठती हूं

छतपर गुजरे वक्त की कई बातें याद आती हैं

कितनी दूर निकल आए जिंदगी जीते जीते न जाने कितनी शामें पीछे छूट जाती हैं 

आज तन्हाई में बैठकर खुद से यूं बातें करना 

अनकही कितनी दास्तानें कह जाती हैं। 

खामोशी में भी गजब का शोर छुपा है 

ये बात भी निरा तन्हा होकर समझ आती है

यूं तो कहने को है बहुत कुछ मगर 

ये चुप्पी सब सह जाती है जैसे .......

कोई भूली बिसरी कहानी याद दिलाती है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन