मुँह में नहीं दांत
मुँह में नहीं दांत
जिनके मुँह में नहीं दांत
वो खा रहे, आजकल आम
जिनके सर पे इल्जाम
वो बोल रहे, हम है राम
क्या होगा आज के वक्त,
बिक रहा सच सरेआम
जिनके मुंह में नहीं दांत
वो खा रहे, आजकल आम
चोर खा रहे आज पकवान
ईमानदार हो रहे, बदनाम
दिखावा जो खूब करते है,
वो पा रहे मुँह मांगा इनाम
आज सादगी हो रही है,
कमजोरी की पहचान
जिनके मुंह में नहीं दांत
वो खा रहे, आजकल आम
साखी सत्य जिनकी जान
वो चँद वक्त बादलों में होते,
रोशनी होती उनकी पहचान
वो मिट जाते है, चंदन बनकर,
पर खुशबू देते वो आठों याम
वो करते न दिखावे के काम
वो खाते दांतो के साथ आम
काम ही होती जिनकी पहचान
वो नहीं है, आलस्य का नाम
वो पीते है, श्रम-पानी
सुबह और शाम
