STORYMIRROR

Laxmi Tyagi

Inspirational Others

4  

Laxmi Tyagi

Inspirational Others

मुक्त

मुक्त

1 min
365

मुक्त होना चाहता ,जीव !


हर बंधन ,हर परिधि से। 


अपनी ही परछाइयों ,छल !


झूठ ,दम्भ के झूठे वादों से। 


जीवन के मायाजाल में उलझा ,


मुक्ति चाहता, बेगाने रिश्तों से। 


चाहता है, मुक्ति दर्द भरी तन्हाइयों से। 


बोता रहा ,बीज़ ! चालाकियों के ,


मुक्ति चाहता है ,उनके अंकुरण से। 


जो बोया ,कटा नहीं, विकारों से।


मुक्त हो ,अपने भार से राहत चाहता है। 


लादा है, बोझ इतना कर्मों का ,


अब तो नामुमकिन लगता है। 


ये जीवन ,चला -चली का खेल लगता है।




[2]  


बेजान होते ,झूठे रिश्तों से ,


ज़बान के'' बेहूदे' शब्दों से ,


प्रलाप क्यों करना ?


अनावश्यक विषयों से। 


होना चाहती हूँ, मुक्त !


बेवजह की पाबंदियों से ,


मुक्ति चाहिए !


 जीवन की व्यथाओं से। 


जीवन लेता, परीक्षाएं ,


मुक्त होना चाहता। 


तमाम उद्वेलनाओं से। 


मुक्ति चाहिए !


गरल और शैतानी विचारों से। 


स्वतंत्र विचरण करती गगन में ,


मुक्त होती रूह !


सहज ,सरल ,सरस् प्रतीत होती है ?


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational