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Amol Nanekar

Romance

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Amol Nanekar

Romance

मुखड़ा

मुखड़ा

1 min
147



आजकल तो बस

एक चाँद नजर आता है मुझे

उसे देखकर मेरा दिल भी

दिन में खो जाता है

और रातों मे जगाता है मुझे

टेंशन कितना भी हो

उसकी स्माइल सजाता है मुझे


यह दिल भी बढ़ा अजीब है,

वो सामने आये तो

न उठाता है मुझे और न

बिठाता है मुझे

आँखों से आँखें मिलाकर

वो मुखड़ा बहुत डराता है मुझे

कितना भी टाल दूँ पर

दिन भर नजर आता है मुझे


रोज़ कहता है गिरती बिजली हूँ मैं

बारिश बनकर वो डराता है मुझे

बदला मौसम दिखाता है मुझे

बारिश बनकर बुलाता है मुझे



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