STORYMIRROR

Parinita Sareen

Classics Inspirational

4  

Parinita Sareen

Classics Inspirational

मुकाम कुछ तो पाना है

मुकाम कुछ तो पाना है

1 min
205

मुकाम कुछ तो पाना है

बलिदानों का कर्ज़ चुकाना है।

यह मौका जो मिला है -

बार बार न आएगा,

एक ही जिन्दगी में सब कुछ कर जाना है।

मुकाम कुछ तो पाना है।


आए थे आखों में सपने सजाए,

कुछ करने का दृढ़ निश्चय बनाए।

गिरे, उठे, फिर गिरे फिर उठे -

उम्र भर बस यही करते जाना है।

मुकाम कुछ तो पाना है।


लहराता तिरंगा देख, मेरे मन में भी उमंग उठे,

क्यों न करें कुछ सबसे अलग ?

क्यों दुर्गम परिस्थितियों के आगे झुकें ?

यही तिरंगा एक दिन हक़ से फहराना है।

करके पूर्ण समर्पण, 

वतन पर अपने कुर्बान हो जाना है।

मुकाम कुछ तो पाना है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics