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Mayank Kumar 'Singh'

Abstract


5.0  

Mayank Kumar 'Singh'

Abstract


मुझे पता है

मुझे पता है

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मुझे पता है

आज उदास हो तुम

मुझे पता है

आज परेशान हो तुम

मुझे पता है

आंसू की मोती गिर रहे हैं तुम्हारे आंखों से

मुझे पता है

इन आंखों के जरिए ढूंढ रही मुझे तुम


मैं ठीक हो जाऊंगा

तुम्हारा प्यार है जो साथ


मुझे यह भी पता है

थोड़ा बीमार हूं मैं आज !


मुझे पता है नहीं हूं तेरे पास

महसूस तो कर इन हवाओं को

देखना कैसे मैं भी हूं बैठा उदास !


आ गया देखों बहुत पास प्रियसी

करीब आना थोड़ा हंस लूँ साथ !


अब मान भी जा ठीक हूं बिल्कुल तेरे साथ

हवाओं में घुल गई है " मोहब्बत "

देख कैसे खेल रहा हूं तेरे साथ !

मत करो , मुझसे प्यार बस हंस दो एक बार .


तुझे अपनी बाहों में भर लूं

इज़ाजत तो दो एक बार

होठों को होठों से करने दो बात

शायद ठीक हो जाऊं मैं फिर एक बार ! !


मुझे पता है आज उदास हो तुम . .



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