मत पालो शैतान को
मत पालो शैतान को
मंदिर मस्जिद गिरजाघर को
इंसानों ने बांट दिया
अहंकार का बीज बोया है
पुराना पेड़ यूं ही काट दिया
काटना है तो काटो अपने अंदर
अहंकार के धाम को
अपने अंदर यूं ही मत पालो शैतान को।
मार डालो शैतान को
जिसने हिंदू-मुस्लिम युद्ध दिया
उस शैतान को जिसने
इंसानों की लाशों से
खून का घूंट पिया
मार डालो शैतान को
जिसके दुष्कर्म के पंजे से
हम मर-मर के जिए।
उस शैतान को जिसने
एक औरत पर हाथ उठाया
मद्रा की प्याली पिए।
जिस दिन वह शैतान मर जाए
तुम दिल से साफ और मन से
सुंदर हो जाओगे
सच्चाई और अच्छाई से
अपना पुन: जन्म जी पाओगे ।
