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अच्युतं केशवं

Romance

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अच्युतं केशवं

Romance

मत किसी को भी बताना

मत किसी को भी बताना

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किसी को भी मत बताना ,

राज की यह बात।

वाटिका में क्या खिला पाटल

हाय कैसी हो रहीं पागल

नित-नवेली रँग-बिरंगी

तितलियों की जात,

मत किसी को भी बताना

राज की यह बात ।

हाथ मँहदी पग महावर के

नदी पहुँची द्वार सागर के

अठखेलियाँ चलती रहीं

आज सारी रात

मत किसी को भी बताना

राज की यह बात ।

स्वप्न आया, थी सुबह सोती

सम्पुटित है सीप में मोती

प्रिय तभी से हो रही हूँ

मैं प्रफुल्लित गात,

मत किसी को भी बताना

राज की यह बात।


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