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Achyut Umarji

Romance Tragedy

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Achyut Umarji

Romance Tragedy

मोहब्बत

मोहब्बत

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बचपन अकेलेपन में निकल गया...

जिंदगी में तुम आयी...

अकेले से हम दुकेले हुए...

ना जाने फिर...

दुकेले से अकेले हुए...

और फिर जो हुआ...

ऐसा नसीब किसी को भी ना मिले...

टूट के जो हम बिखरे हैं...

हम कोशिश में हैं की संभल जाएं...

पर ये जो तेरी यादें हैं...

पीछा नहीं छोड़ती...

यादें दुकेला करना चाहती है...

और वास्तविकता का पाठ पढ़ा रही है...

मजबूर हैं, बेबस हैं...

तेरी कमी महसूस हो रही है...

अकेले हैं...! चले आओ।



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