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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

मन की शांति

मन की शांति

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मन की शांति कहाँ मिले, बता मुझे भगवान।

मन रहता भटके सदा, जब भी करती ध्यान।।


मन की शांति ढूंढ रहा, इधर-उधर इंसान।

शांति मिलेगी चित्त को, कर ले प्रभु का ध्यान।।


धन-दौलत करते जमा, डूबे भोग विलास ।

मन की शांति चली गई, टूट गई सब आस।।


लोभ दंभ पाखंड की, मुख पर रहती कांति।

क्रोध मोह में डूब कर, खोया मन की शांति।


मन की शांति मिले नहीं, कोई हाट बाजार।

राह सत्य चलते रहो, मिलता चैन करार।।



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