STORYMIRROR

सामंत कुमार झा 'साहित्य'

Inspirational

3  

सामंत कुमार झा 'साहित्य'

Inspirational

मज़हब के नाम पर

मज़हब के नाम पर

1 min
192


मज़हब के नाम पर सब लड़ते हैं,

मज़हब के नाम पर दंगे करते हैं।

मज़हब नहीं सिखाता बैर रखना,

कहकर भी सभी मारते मरते है।


मज़हब का मज़ाक बनाया जाता है,

इस नाम पर दंगा फैलाया जाता है।

मज़हब को महान बनाने के लिए,

मज़हब के नाम को गिराया जाता है।


मज़हब का मतलब जानता नहीं कोई,

इसको अच्छे से पहचानता नहीं कोई।

ये लोग क्या जाने मज़हब क्या है बस,

दंगे फैलाते मज़हब मानता नहीं कोई।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational