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Navneet Gupta

Abstract Tragedy Thriller

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Navneet Gupta

Abstract Tragedy Thriller

मिचोंग की यात्रा

मिचोंग की यात्रा

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तूफान जो उठता है समुद्र के गर्भ से॥

.. वो गर्भित कब होता है

अन्वेषण का विषय होगा॥

चार छ दिन 

हवाओं का विक्षोभ , हिला डालने वाली गति

बादलों में हलाहल

हवा के साथ चलते 

जैसे आर्मी एयर फ़ोर्स साथ साथ चले

दुश्मन की बर्बादी को॥


क्या पानी और हवा मिलकर

अपनी धरती को हिलाने आते हैं बार बार

कुछ नहीं तो उसके जीवों को

ही तहसनहस कर जाते हैं॥

बर्बादियों की दास्तान कहने॥

अपनीं प्रचंडता सुनाने॥

कुछ तो अन्दर की बात होगी॥


और उनके आक्रोश के थमने की भी

गति कमतर हो ही जाती है

भला कब तक कोई 

क़हर ढा सकता है॥

बस निशाँ और नाम काल खंड पर 

छोड़ते॥


मानव जीवन में भी कम तूफान नहीं आते

कुछ ऊपर जैसे दैवी॥

कुछ सामाजिक और पारिवारिक ॥

उन सब की भी तो सीमा आती है

जब वो भी मिट जाते

मुख्य पात्रों के साथ साथ॥


यूँ भी कहें कि

यह को अपने तूफ़ानों पर

अपने हस्ताक्षर लिखने हैं॥


मिचौंग भी कल तक झड़ कर

सो जायगा, काल चक्र में॥

याद है ना

6 दिसम्बर कल॥


कभी पहिले आया 6 दिसम्बर का तूफान

वो भी आया था

धर्मांन्धता का।

…वो तो शायद थम चुका है॥

… उससे गर्भित कुछ

कभी किसी काल में 

आगे कब आये पता नहीं॥


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