महत्वाकांक्षा
महत्वाकांक्षा
महत्वाकांक्षा अवसाद की बुनियाद है।
कोई भी इच्छा ही चिंता की शुरुआत है।
महत्वाकांक्षी होना अच्छा है,
लेकिन यह तो सोचो तुमने की क्या इच्छा है?
तुम्हारी महत्वाकांक्षाओं के तले रौंदे जाएंगे किसी के सपने तो नहीं?
कहीं किसी की भावनाओं और इच्छाओं की चढ़ेगी बलि तो नहीं?
कहीं अपनी महत्वाकांक्षाओं के चलते तुम हो रहे अन्याय के पथ पर अग्रसर तो नहीं?
कहीं अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरी करने के लिए तुम चला रहे बंदूक किसी दूसरे के कंधे पर रख कर तो नहीं।
यदि महत्वाकांक्षा दूसरों का भला करने की है, प्राणी मात्र को सुख देने की है,
यकीन मानो आप हो बिल्कुल सही।
कर्म क्षेत्र में जुट जाओ,
अपने सपने पूरे कर जाओ।
परमात्मा ने तुम्हें भेजा धरती पर है केवल इसलिए ही।
यदि महत्वाकांक्षा है ऐसी कि तुम्हें केवल खुद को बढ़ाना है।
जो आए रास्ते में उन्हें तुम को मिटाना है।
तो निश्चित ही समझ लो, भले ही मिल रही है तुम्हें विजय श्री,
लेकिन यह रास्ता खत्म होता है अवसाद पर ही।
